उत्तराखण्ड की नौकरशाही में इस समय एक ‘चरण-चटौरा’ IAS अधिकारी अपने “पॉलिटिकल बिग बॉस” के हाथों का “टूल” बनकर विभागीय मंत्री के खिलाफ ऐसे मुजरे कर रहा है कि देखने वाले अपनी आँखें मल रहे हैं।
सुनने में आया है कि यह ‘सचिव’ महोदय, अपने ‘पॉलिटिकल बॉस’ की धुन पर ‘आइटम नंबर’ करने में इतने मशगूल हैं कि मंत्री को सरेआम उन्हें लताड़ लगानी पड़ती है।
हालत यह है कि कई महत्वपूर्ण बैठकों में, मंत्री का गुस्सा जब ‘ज्वालामुखी’ बनकर फूटा, तो बेचारे ‘प्यादे’ IAS साहब को अपनी इज़्ज़त बचाने और शायद शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए, बैठक छोड़कर “पानी पीने” के बहाने दौड़ लगानी पड़ी! यह साबित करता है कि डर और पानी की कमी उन्हें एक साथ होती है, जब उनके “बिग बॉस” का मिशन खतरे में पड़ता है।
इससे भी मजेदार यह है कि केवल मंत्री जी ही नहीं, उनके ‘पी.आर.ओ.’ भी इन सचिव साहब का ‘स्वास्थ्य खराब’ करने का ठेका उठा चुके हैं। बेचारे बैठकों में राजनीतिक ‘झटके’ और स्वास्थ्य ‘खराबी’ दोनों से जूझ रहे हैं—शायद यह ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ का नया सरकारी तरीका है।
योजनाओं में “अड़ंगे अटकाना” तो एक पुरानी, क्लासिक सरकारी रस्म थी, जो समझ में आती है। लेकिन अब तो इस ‘बिग बॉस’ के वफ़ादार’ IAS ने वफ़ादारी का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। मंत्री जी को काउंटर करने के लिए, इन्होंने अपने स्तर पर ही ‘प्रेस नोट’ और ‘मीडिया मैनेजमेंट’ का प्राइवेट ठेका ले लिया है!
यह महोदय, जो एक समय राज्य की सेवा के लिए संविधान की शपथ लेकर आए थे, अब एक पॉलिटिकल प्यादा बनकर अपने असली बॉस (जो विभागीय मंत्री नहीं हैं) के लिए सत्ता-संघर्ष के अखाड़े में उछल-कूद कर रहे हैं।
इनकी उछल-कूद देखकर तो यही लगता है कि उत्तराखण्ड की नौकरशाही अब सरकारी कामकाज कम और राजनीतिक कॉमेडी शो ज़्यादा बन गई है!








