देहरादून। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने और कम पानी में अधिक उत्पादन का लक्ष्य लेकर चलाई जा रही प्रधानमंत्री...
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Read moreदेहरादून। उत्तराखंड सरकार के वीआईपी कार्यक्रमों की चमक-दमक के पीछे रोडवेज कर्मचारियों की बदहाली की एक गंभीर तस्वीर सामने आई...
Read moreदेहरादून। जनता के पैसे से बनी सरकारी इमारत पर आखिर किसका हक है—सरकार का, जनता का या सत्ता से जुड़े नेताओं का? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) की एक सरकारी संपत्ति पर राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष नरेश बंसल का तीन वर्षों से कब्जा बना हुआ है। आरोप केवल कब्जे का नहीं, बल्कि सरकारी नियमों को दरकिनार कर किराए में भारी रियायत और उसके बाद वर्षों तक किराया नहीं चुकाने का भी है। पंचायत रिपोर्टर के हाथ लगे दस्तावेजों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने साल 2023 में एक पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से अनुरोध किया । जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सिफारशी निर्देश दिए ,और GMVN को निगम के देहरादून के पॉश इलाके राजपुर रोड पर स्थित कार्यालय की इमारत के दूसरे तले पर स्थित एक हॉल उपलब्ध कराने की सिफारिश की। मुख्यमंत्री के पत्र के बाद GMVN ने किराया निर्धारण के लिए जिलाधिकारी कार्यालय को लिखा। और किराया निर्धारण का अनुरोध किया । सरकारी खजाने को हर महीने ₹1.35 लाख का नुकसान? SEBI से ₹1.73 लाख, सांसद नरेश बंसल से सिर्फ ₹38 हजार किराया! गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) की सरकारी संपत्ति के किराया निर्धारण में बड़ा अंतर सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, 117.76 वर्ग मीटर के इसी हॉल के लिए पहले SEBI से ₹136.50 प्रति वर्ग फुट की दर से लगभग ₹1.73 लाख प्रतिमाह किराया लिया जाता था। लेकिन मुख्यमंत्री की सिफारिश के बाद राज्यसभा सांसद नरेश बंसल को यही हॉल ₹322.66 प्रति वर्ग मीटर (करीब ₹30 प्रति वर्ग फुट) की दर से आवंटित किया गया। इस हिसाब से उनका मासिक किराया लगभग ₹38 हजार बैठता है। यानी जिस सरकारी हॉल से पहले निगम को हर महीने लगभग ₹1.73 लाख की आय होती थी, उसी हॉल से अब करीब ₹38 हजार ही तय किए गए। सीधे शब्दों में कहें तो हर महीने लगभग ₹1.35 लाख की कमाई घट गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि करीब तीन वर्षों से इस किराए का भुगतान भी नहीं किया गया, जबकि हॉल पर सांसद का कब्जा बना हुआ है और उस पर उनका ताला लगा है। यदि यही हॉल पहले की तरह SEBI वाली दर पर किराए पर रहता, तो गढ़वाल मंडल विकास निगम को इसी अवधि में लगभग ₹62.29 लाख की आय होती। यानी रियायती किराया तय किए जाने से ही निगम को लगभग ₹48.61 लाख के संभावित राजस्व का अंतर पड़ा। लेकिन ये रियायती किराया यानी लगभग ₹13.68 लाख भी नरेश बंसल ने नहीं चुकाया है । सांसद बंसल ने राज्यसभा चुनावों में जो एफिडेविट अपनी संम्पत्ति का ब्यौरा दिया है उसमें वो करोड़ पति है । अब सवाल सिर्फ रियायती किराए का नहीं है, बल्कि यह है कि— आखिर किस नियम के तहत किराया करीब 78 प्रतिशत तक घटा दिया गया? सरकारी संपत्ति पर कब्जा होने के बावजूद किराया क्यों नहीं वसूला गया?...
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