कॉर्बेट नेशनल पार्क के धनगढ़ी गेट पर रविवार को वन ग्राम सुंदरखाल और देवीचौड़ा खत्ता के ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। भाजपा सांसद अनिल बलूनी की वादाखिलाफी से गुस्साए ग्रामीणों ने गेट के बाहर धरना देकर भाजपा सरकार और सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 25 दिसंबर तक गांवों में बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिला, तो वे सांसद अनिल बलूनी और भाजपा सरकार के खिलाफ हल्ला बोल आंदोलन शुरू करेंगे।
ग्रामीणों ने बताया कि बीते लोकसभा चुनाव के दौरान अप्रैल 2024 में सांसद अनिल बलूनी स्वयं गांव पहुंचे थे और ग्रामीणों से वादा किया था कि चुनाव जीतने के एक महीने के भीतर गांव में बिजली पहुंचा दी जाएगी। लेकिन डेढ़ साल बाद भी हालात जस के तस हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वे दो बार सांसद बलूनी से दिल्ली जाकर मिले और हर बार उन्हें “एक सप्ताह में बिजली-पानी की सुविधा” देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन वह भी आज तक पूरा नहीं किया गया।
धरना स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि 25 वर्षों से चली आ रही भाजपा-कांग्रेस की डबल इंजन सरकारें वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने के नाम पर सिर्फ वोट बटोरती रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी की “देश के अंतिम गांव तक बिजली पहुंचाने” की घोषणा भी ग्रामीणों के लिए सिर्फ जुमला बनकर रह गई है।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि उत्तराखंड में आज भी 200 से अधिक गांव ऐसे हैं जिन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिला है। इन क्षेत्रों के लाखों लोग विधायक और सांसद तो चुन सकते हैं, लेकिन आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी उन्हें ग्राम पंचायत चुनने का अधिकार तक नहीं दिया गया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा—
“हम अपने वोट से नेताओं को कुर्सी पर बिठा सकते हैं, तो उन्हें उतार भी सकते हैं। सरकार हमारी आवाज सुने, वरना आंदोलन तेज होगा।”
धरना प्रदर्शन में खीमराम, प्रेमराम, कौशल्या चुनियाल, गिरीश चंद्र, जगमोहन सिंह, कैलाश चंद्र, पूरन चंद्र, मीरा, इंद्र लाल, योगेन्द्र कुमार, गणेश, उत्तम चंद्र, समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के मौ. आसिफ और महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी समेत सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।








