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Home Uttarakhand

BKTC जांच रिपोर्ट लीक, हो गया बड़ा खुलासा ! अधूरी जांच में दोषियों का फैसला कैसे?

Panchayat Reporter by Panchayat Reporter
July 12, 2026
in Uttarakhand, उत्तराखंड, देहरादून, बड़ी खबर, विशेष, स्पेशल, होम
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BKTC जांच रिपोर्ट लीक, हो गया बड़ा खुलासा ! अधूरी जांच में दोषियों का फैसला कैसे?
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केदारनाथ में साल 2025 में मंदिर समिति द्वारा वीआईपी की आवभगत, उनके रहने और खाने पर लाखों रुपये खर्च करने के आरोप लगे। इसके बाद मंदिर समिति ने एक जांच बैठा दी।
इस जांच की रिपोर्ट 20 दिनों में आ जानी चाहिए थी, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी यह जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। लेकिन पंचायत रिपोर्टर के हाथ यह पूरी जांच रिपोर्ट लगी है। इस जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने पर पता चलता है कि यह जांच रिपोर्ट मानो किसी को बचाने और किसी को फंसाने के लिए की गई है। जिन लोगों ने यह जांच की है, उन्हीं की जांच की जानी चाहिए। ऐसा इस जांच रिपोर्ट को देखने पर प्रतीत होता है।
रिपोर्ट प्रथम दृष्टया इस नतीजे पर पहुंची है कि वित्तीय अनियमितता हुई है और जो भुगतान बीकेटीसी की तरफ से किया गया है, उसकी अनुमति नहीं ली गई। इसके लिए तत्कालीन सीईओ, तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी और तत्कालीन व्यवस्थापक को दोषी बनाया गया है।
रिपोर्ट का यह तथ्य बेहद कमजोर और भ्रामक है। साथ ही यह केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल और भाजपा की युवा नेता नेहा जोशी को भी झूठा साबित करता है। हम बताते हैं कैसे।
रिपोर्ट इस बात को साबित करती है कि खर्च मंदिर समिति की तरफ से किया गया है। इस रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि पिछले वर्षों के समान इस साल भी महानुभावों के लिए बजट की व्यवस्था की गई थी। यानी इससे यह साबित होता है कि खर्च समिति ने किया। इसके लिए क्या ये दोनों भाजपा नेता अपने झूठ के लिए माफी मांगेंगे?
दूसरा तथ्य यह रखा गया है कि इसकी वित्तीय स्वीकृति नहीं ली गई। यहां पर यह कहने की कोशिश हो रही है कि किसी भी खर्च की स्वीकृति समिति के बोर्ड या फिर अध्यक्ष से नहीं ली गई।
इसका सबसे अहम पहलू यह है कि 2 मई को केदारनाथ के कपाट खुले, जब ये तमाम व्यवस्थाएं की गई थीं। उस समय बीकेटीसी के अध्यक्ष या बोर्ड से अनुमति लेने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उस समय बोर्ड का गठन ही नहीं हुआ था। न ही मंदिर समिति में कोई अध्यक्ष था और न ही बोर्ड का गठन हुआ था। दरअसल, हेमंत द्विवेदी के अध्यक्ष बनने की अधिसूचना 4 मई को जारी की गई और उन्होंने 6 मई को अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला। इसलिए बोर्ड से स्वीकृति का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन बोर्ड गठन के बाद 9 जुलाई की बैठक में इन खर्चों को पास करवा लिया गया।
इतना ही नहीं, मई के महीने में अध्यक्ष पद खाली रहने की वजह से शासन से कपाट खुलने के समय होने वाले आवश्यक व्ययों की स्वीकृति 8 मई 2025 को ही ले ली गई थी।
इसके अतिरिक्त, साल 2012 का शासनादेश इस बात की अनुमति देता है कि मंदिर समिति का सीईओ नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक नीतिगत फैसलों के अलावा सभी फैसले ले सकता है।
ये सारे तथ्य बताते हैं कि इस रिपोर्ट में लगाया गया एकमात्र आरोप नियमों के सामने कहीं भी नहीं ठहरता।
जो रिपोर्ट सामने आई है, उसे देखकर लगता है कि जांच के कई पक्षों को जानबूझकर छोड़ दिया गया है। इस पूरी रिपोर्ट में केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल से कोई पूछताछ नहीं की गई है। इसमें नेहा जोशी के पक्ष के लिए एक पत्र का हवाला दिया गया है, लेकिन उस पत्र में उन्होंने अपने पक्ष में क्या तथ्य पेश किए हैं, यह कहीं लिखा ही नहीं है। एक बात को यह रिपोर्ट जरूर रेखांकित करती है कि उन्होंने अपने पक्ष में किसी भी तरह का कोई बिल प्रस्तुत नहीं किया है। कुल मिलाकर भाजपा की इन दोनों नेताओं से जांच समिति ने सीधे कोई बात ही नहीं की।
नेहा जोशी ने कहा कि उन्होंने खुद भुगतान किया। वे गायत्री भवन में रुकी थीं। इस जांच समिति ने गायत्री भवन का पक्ष भी नहीं लिया, जबकि गायत्री भवन को मंदिर समिति की तरफ से साठ हजार रुपये का भुगतान किया गया है।
एक गंभीर सवाल इस रिपोर्ट पर यह भी खड़ा हो रहा है कि जिन तीन लोगों को इस रिपोर्ट में दोषी बनाया गया है, उन तीनों से भी उनका पक्ष जानने की कोई कोशिश ही नहीं की गई।
इतना ही नहीं, यह जांच रिपोर्ट खुद कहती है कि यह जांच अभी अधूरी है। रिपोर्ट में लिखा है कि, “इसी प्रकार मंदिर समिति द्वारा अन्य अतिथियों हेतु होटलों एवं विश्राम गृहों में आरक्षित कमरों तथा उनके भुगतान के संबंध में भी सत्यापन की कार्यवाही प्रचलित है।” कुल मिलाकर यह रिपोर्ट खुद कह रही है कि अभी जांच अधूरी है।
ऐसा लगता है मानो यह जांच रिपोर्ट किसी को जानबूझकर फंसाने और किसी को बचाने के लिए बनाई गई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद यह था कि क्या केदारनाथ में भक्तों के चढ़ावे के पैसे से नेताओं की सेवा की जा रही है। यह रिपोर्ट इस मामले में कुछ भी ठोस नहीं बताती। बल्कि भाजपा नेताओं को बचाती हुई नजर आती है।
एक तथ्य जो इस रिपोर्ट से पूरी तरह साफ है, वह यह है कि भाजपा नेताओं की सेवा में मंदिर समिति ने पैसे खर्च किए। तो क्या अब अपने झूठ के लिए केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल और भाजपा नेता नेहा जोशी माफी मांगेंगी?

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