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Home Uttarakhand

सब मैनेज है ?

Panchayat Reporter by Panchayat Reporter
August 15, 2024
in Uttarakhand
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सब मैनेज है ?
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सब मैनेज है ?

उत्तराखण्ड की राजनीति का ये अनोखा चलन है ,प्रदेश को जैसे ही नया मुख्यमंत्री मिलता है उसके बदले जाने की डेट पर दावे हवा में उछाले जाने लगते है । इसमें कुछ नया नहीं है । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुर्सी हिलने वाली है इस खबर का हर 6 महीने में हवा में तैर जाना भी कुछ नया नहीं है । लेकिन इस बार कुछ नया है तो वो है मैनेजमेंट ।

सी एम पुष्कर सिंह धामी की बतौर मुख्यमंत्री क्या परफोर्मेंस है उसका आंकलन अलग से किया जा सकता है । लेकिन उनके मैनेजमेंट देख रहे सरकारी और गैर सरकारी मैनेजरों ने नेक्स्ट लेवल का गर्दा उडाया हुआ है ।

हाल के ही घटनाक्रम पर नजर डालें तो उनके प्रबंधन का अलग ही जौहर दिखाई देता है । अपनी ही सरकार के साथी कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत की फोटो प्रधानमंत्री के साथ जब सोशल मीडिया में आई तो उस तस्वीर के कई मायने निकाले जाने लगे । धाक्कड़ धामी को इस बोलती तस्वीर पर सोशल मीडिया में आने वाली प्रतिक्रियाओं ने असहज जरुर किया होगा । और इसलिए शुरु हुआ नहले पर दहला फैंकने का खेल। एक फोटो के जवाब में कई फोटो सी एम दरबार से जारी की गई । इसमें कई ऐसे विधायकों की तस्वीरें भी थी जिन्हे मुख्यमंत्री धामी ने अपनी राजनीति के रीसाईकल बिन री स्टोर किया था ।

मामला विधायकों तक नहीं रुका संगठन के कई पुराने चेहरों की शिष्टाचारी भेंट गुलदस्तों के साथ हुई । और तमाम क्लिक होने के बाद समय था खबरें प्लांट करने का । अखबारों और चैनलों में इस मेल मिलाप को मंत्री मण्डल विस्तार और लाल बत्ती के बंटवारे के औचित्य रुपी आवरण से ढका गया । “अब जल्द 4 मंत्री पद भरे जाऐंगे” जैसी हैडलाईन परोसी गई । हालांकि मंत्री मण्डल विस्तार और लाल बत्ती के बंटवारे की कई तारीखों की एक्सपायरी भी एक्सपायर हो चुकी है ।
इस खबर पर संगठन की मोहर लागने के लिए प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम भी मैदान में उतर आए और सी एम धामी का यशोगान किया और दिल्ली से बयान जारी किया कि संगठन स्तर पर मंत्री मण्डल विस्तार पर सहमति बना ली गई है। अब फैसला आलाकमान लेगा । हालांकि लाल बत्ती और मंत्रियों की लिस्ट कई बार देहरादून से दिल्ली तक का सफर कर चुकी है । और दुष्यंत गौतम का ये बयान भी कई मरतबा सुना जा चुका है।

लेकिन सवाल ये है कि अचानक अपने ही कैबिनेट मिनिस्टर की तस्वीर आने से क्या सी एम धामी असहज हो गए ? और उन्हें इस इमेज मैनेजमेंट की जरुरत पड़ी ? क्या उन्हे खतरा अपने घर में ही महसूस हो रहा है। ऐसे कई सवाल जहन में आते हैं ।
अचानक आती तस्वीरें और असमय होता मंत्रीमण्डल पर चिंतन किसी डेमेज को कंट्रोल करने के लिए तो नहीं था ? क्या विधायकों और कार्यकर्ताओं कि किसी नारजगी को फिलहाल कम कर देने के लिए ये माहौल तो नहीं खड़ा किया गया है ?

धन सिंह रावत की इस तस्वीर के चर्चाओं में आ जाने के बाद कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और सुबोध उनियाल की तस्वीरें गृह मंत्री अमित शाह के साथ सामने आई । मुख्यमंत्री धामी भी दो दिनों के दौरे पर दिल्ली गए इस दौरान वो जल शक्ति मंत्री और पौड़ी से सांसद अनिल बलूनी मिले । उम्मीद की जा रही थी कि उनके इस दौरे के बाद उनकी भी तस्वीर अमित शाह या पी एम नरेंद्र मोदी के साथ दिखाई देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।
फोटो पॉलिटिक्स में पुष्कर सिंह धामी ने किसी तरह का भेदभाव नहीं रखा है । विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ भी वो खुलकर क्लिक करवाते हैं । हालांकि अपने संगठन और विधायकों के साथ आई उनकी तस्वीरों ना जाने क्यों सोशल मीडिया के चकडैत दुर्लभ की श्रेणी में रखते हैं।

संगठन ,मीडिया और विपक्ष को जितनी काबलियत से धाक्कड़ धामी हैंडल कर रहे हैं इतनी दक्षता उत्तराखण्ड के इतिहास में किसी दूसरे मुख्यमंत्री में नहीं दिखाई दी । कई बडे दिग्गज नेताओं ने धामी का ये हुनर देख अपने नाखून चबा डाले हैं ।

सियासत में विपक्षी दलों के पैतरों को मैनेज करने के लिए दांव पेंच हर सरकार चलती है। पदों पर आसीन हर नेता सबको साथ रखने और अपनी इमेज बिल्डिंग के लिए प्रबंधन तो करता ही है । लेकिन सवाल यहाँ ये ही कि अपने ही संगठन और विधायकों को मैनेज करने की नौबत तब आती है जब दांव पर कुर्सी हो ।

 

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