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Home Uttarakhand

उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति पर सख्त आदेश, वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश

Panchayat Reporter by Panchayat Reporter
April 2, 2025
in Uttarakhand
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उत्तराखंड शासन ने बड़े स्तर पर IAS और IPS अधिकारियों के दायित्व में किया फेरबदल
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उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति के नाम पर अन्य विभागों में लंबे समय तक टिके रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए वित्त विभाग का नया आदेश एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। सचिव वी. षणमुगम ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वित्त विभाग ने सभी प्रमुख सचिव, सचिव, मंडल आयुक्त और विभागाध्यक्षों को पत्र लिखकर प्रतिनियुक्ति और बाह्य सेवा से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया है।

प्रतिनियुक्ति को लेकर अब तक स्पष्ट आदेश नहीं था

 

 

 

अब तक राज्य में प्रतिनियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं थे, और उत्तर प्रदेश सरकार का 1999 का आदेश ही उत्तराखंड में लागू माना जाता रहा है। इस आदेश के अनुसार, यदि किसी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति की अवधि तीन साल पूरी हो जाती है, तो उसका विस्तार केवल वित्त विभाग की स्वीकृति से ही संभव होगा।

वित्त विभाग के नए निर्देश

वित्त विभाग ने अब प्रतिनियुक्ति को लेकर कुछ सख्त नियम बनाए हैं:

 

 

 

प्रतिनियुक्ति के लिए पात्रता: केवल वे कर्मचारी या अधिकारी प्रतिनियुक्ति के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने अपनी मूल तैनाती में कम से कम 5 वर्ष पूरे किए हों।

अवधि की सीमा: प्रतिनियुक्ति की अवधि अधिकतम 3 साल होगी, जिसे वित्त विभाग की स्वीकृति से 2 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। इस तरह, कुल प्रतिनियुक्ति अवधि अधिकतम 5 वर्ष होगी।

कूलिंग पीरियड: प्रतिनियुक्ति पूरी होने के बाद संबंधित कर्मचारी को अगले 5 वर्षों तक मूल विभाग में ही कार्य करना होगा। उसके बाद ही वह दोबारा प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन कर सकेगा।

सीमित अवसर: किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को पूरे सेवा काल में केवल दो बार ही प्रतिनियुक्ति या सेवा स्थानांतरण का अवसर मिलेगा।

विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त स्वीकृति

यदि कोई कर्मचारी 5 साल की अधिकतम सीमा पार कर चुका है और उसका मूल विभाग तथा प्रतिनियुक्ति वाला विभाग सहमत हैं, तो इस स्थिति में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।

बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं में छूट

बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं में कार्यरत कर्मियों के लिए 5 वर्ष की सीमा लागू नहीं होगी, लेकिन इसके लिए भी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति का अनुमोदन आवश्यक होगा।

प्रतिनियुक्ति के लिए आवश्यक शर्तें

प्रतिनियुक्ति या सेवा स्थानांतरण के लिए आवेदन करने वाले कर्मचारियों को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे:

मूल विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC)

प्रशासनिक विभाग द्वारा स्थायीकरण की पुष्टि

कर्मचारी के खिलाफ किसी भी प्रकार की न्यायिक, प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही न होने का प्रमाण पत्र

सेवा समाप्ति के निकट कर्मियों को प्रतिनियुक्ति नहीं

जिन कर्मियों की सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें प्रतिनियुक्ति या सेवा स्थानांतरण पर नहीं भेजा जाएगा। यदि कोई कर्मी प्रतिनियुक्ति के दौरान इस अवधि में पहुंच जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से मूल विभाग में वापस बुलाया जाएगा।

वित्त विभाग का उद्देश्य

इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मूल विभागों से प्रतिनियुक्ति पर गए कर्मी समय समाप्त होने के बाद वापस लौटें। अब तक यह देखा गया था कि कई अधिकारी और कर्मचारी एक बार प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद वापस नहीं लौटते थे। हालांकि, बाह्य परियोजनाओं में कार्यरत कर्मियों को कुछ छूट देकर वित्त विभाग ने उन्हें राहत प्रदान की है।

नए निर्देशों से यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तराखंड सरकार अब प्रतिनियुक्ति की अनियंत्रित प्रक्रिया को समाप्त कर इसे सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाना चाहती है।

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