देहरादून (सेलाकुई): उत्तराखंड के सेलाकुई क्षेत्र में खाद्य पदार्थों के खिलाफ पुलिस की एक तथाकथित बड़ी कार्रवाई अब खुद पुलिस विभाग के लिए गले की फांस बन गई है। नियमों की अनदेखी और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों के बाद, प्रभारी आईजी रेंज सदानंद दाते के हस्तक्षेप पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले में लापरवाही बरतने के दोषी पाए जाने पर वरिष्ठ उप निरीक्षक (SSI) जितेंद्र कुमार और तीन अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
बीते 2 फरवरी 2026 को सेलाकुई पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने एफडीए (FDA) टीम के साथ मिलकर 250 किलो पनीर और 50 किलो दही बरामद किया, जिसे खराब बताते हुए मौके पर नष्ट कर दिया गया। लेकिन दुकानदार (पीड़ित पक्ष) ने इस पूरी कार्रवाई को फर्जी करार देते हुए पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया और सीसीटीवी (CCTV) साक्ष्य के साथ आईजी से शिकायत की।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे ये 5 गंभीर सवाल
पीड़ित पक्ष की शिकायत और जांच में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिन्होंने पुलिस की थ्योरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है:
- फर्जी चालान का आरोप: पीड़ित का कहना है कि जब वह और उसकी गाड़ी थाने में मौजूद थे, तब पुलिस ने धूलकोट तिराहे पर ‘ओवर स्पीडिंग’ और ‘सीट बेल्ट’ जैसे आरोपों में ₹28,500 का भारी-भरकम चालान काट दिया। सवाल यह है कि खड़ी गाड़ी का ओवर स्पीडिंग चालान कैसे हुआ?
- BNSS की धारा 105 का उल्लंघन: नई कानूनी संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के अनुसार, जब्ती और तलाशी के दौरान वीडियोग्राफी अनिवार्य है। आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर इस नियम का पालन नहीं किया।
- रिकवरी की लोकेशन पर विवाद: पुलिस का दावा था कि पनीर गाड़ी से बरामद हुआ, जबकि सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर दिख रहा है कि दुकान के बाहर रखा पनीर वापस गाड़ी में रखवाया जा रहा था।
- सैंपलिंग में देरी: डेयरी उत्पादों को 5 घंटे तक धूप में खड़ी गाड़ी में रखा गया। पीड़ित का आरोप है कि जानबूझकर सैंपल खराब करने के लिए ऐसा किया गया या फिर माल बदल दिया गया।
- नेतृत्व पर सवाल: पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस टीम का नेतृत्व थाना अध्यक्ष पी.डी. भट्ट कर रहे थे, लेकिन कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मियों पर हुई है। अब पीड़ित परिवार न्याय के लिए डीजीपी के पास जाने की तैयारी में है।
अधिकारियों का पक्ष
जहाँ एक ओर एसएसपी देहरादून अजय सिंह का कहना है कि सैंपल लैब भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार है, वहीं सीसीटीवी फुटेज के विरोधाभास ने विभाग की छवि धूमिल की है। आईजी सदानंद दाते की जांच रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि छापेमारी के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया था।






