बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे से जुडी चोरी के मामले में आखिरकार बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जांच के आदेश दे दिए हैं। वही BKTC, जो सुबह तक इस पूरे मामले को सिरे से नकार रही थी, अब कह रही है कि जांच होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुबह जब पंचायत रिपोर्टर की टीम ने हेमंत द्विवेदी को फोन किया तो उन्होने ऐसी किसी भी घटना से इन्कार किया

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब सिर्फ जांच समिति नहीं बल्कि मंदिर समिति के शीर्ष अधिकारियों को भी देना होगा।
पहला सवाल
आखिर पहली बार BKTC अध्यक्ष ने अपने वैयक्तिक सहायक को तीन अहम ड्यूटी मंदिर के अंदर क्यों दी
बीकेटीसी अध्यक्ष ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि संबंधित व्यक्ति उनका निजी सचिव नहीं बल्कि समिति का नियमित कर्मचारी है, जो पहले भी कई अध्यक्षों के साथ काम कर चुका है। लेकिन सवाल यह नहीं है कि वह नियमित कर्मचारी है या नहीं। सवाल यह है कि उसकी ड्यूटी मंदिर के उस संवेदनशील हिस्से में क्यों लगाई गई, जहां दान और चढ़ावे की प्रक्रिया होती है? इतना ही नही वो दान की गिनती की प्रक्रिया थाली भेंट कहा जाता है का नोडल अधिकारी हेमंत द्विवेदी के आदेशों के बाद ही बनाया गया था । इसके अलावा उसे प्रटोकॉल का प्रभार भी दिया गया था । एक ही व्यक्ति को इतनी जिम्मेदारियाँ देना सवालों के घेरे में ।
दूसरा सवाल
सुबह तक BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी इस पूरे मामले को पूरी तरह खारिज कर रहे थे। लेकिन उसी समय तक मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ सीसीटीवी फुटेज की जांच कर चुके थे और मामला अध्यक्ष के संज्ञान में भी ला चुके थे।
यदि जांच शुरू हो चुकी थी, तो फिर चोरी या कथित अनियमितता की संभावना को सुबह ही पूरी तरह नकारने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? आखिर अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी किस को बचाना चाहते थे ।
तीसरा सवाल
क्या पहले कभी किसी अध्यक्ष ने अपने वैयक्तिक सहायक को एक साथ प्रोटोकॉल, मंदिर व्यवस्था और दान से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी थी?
यदि नहीं, तो इस बार परंपरा क्यों बदली गई?
पांचवां सवाल
क्या जांच सिर्फ उस कर्मचारी तक सीमित रहेगी, या फिर उन अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचेगी जिन्होंने उसे ये जिम्मेदारियां सौंपीं?
क्योंकि यदि किसी कर्मचारी ने नियमों का उल्लंघन किया है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उसे वहां तक पहुंचने की अनुमति किसने दी।
बीकेटीसी ने जांच समिति गठित करने की घोषणा कर दी है। यह स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन इस मामले में सिर्फ यह पता लगाना पर्याप्त नहीं होगा कि किसी कर्मचारी ने क्या किया।
जांच का असली उद्देश्य यह होना चाहिए कि प्रशासनिक स्तर पर निर्णय किसने लिए, किस आधार पर लिए और क्या उन निर्णयों ने व्यवस्था को कमजोर किया।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े बदरीनाथ धाम में पारदर्शिता केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि जवाबदेही से आएगी।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जांच सिर्फ निचले स्तर तक सीमित रहती है या जिम्मेदारी तय करने के लिए शीर्ष स्तर तक भी पहुंचती है।








