मुख्यमंत्री चंपावत को आदर्श जिला बनाने का सपना संजोय बैठे हैं । और पर्यटन विभाग उनके इस सपने को जैसे रौंदने में कोई कोर कसर नहीं छोड रहा है । इतना ही नहीं ये प्रशन भी खडा हो रहा है कि क्या पर्यटन विभाग युवाओं की जान भी जोखिम में तो नहीं डाल रहा है ?

मुख्यमंत्री अपने चुनावी क्षेत्र चंपावत को एडवेंचर स्पोर्टस का हब बनाने के लिए योजनाऐं बना रहें हैं इसके लिए मोटा बजट जारी कर रहे हैं । तो वहीं पर्यटन विभाग इस बजट को ऐसी जगह बहा रहा है जिसका लाभ उनके क्षेत्र के युवाओं को होने की संभावनाऐं बहुत कम हैं ।
चंपावत को पैराग्लाईडिंग हब बनाने और चंपावत के युवाओं को पैराग्लाईडिंग के जरिए रोजगार से जोडने के लिए क्षेत्र में पैराग्लाईडिंग ट्रैनिंग करा रही है । और ये ट्रैनिंग पर्यटन विभाग के अंर्तगत आने वाली पर्यटन विकास परिषद करवा रही है । चंपावत के डांडा में 6 नवम्बर से 25 नवम्बर तक प्रथम बैच और 26 नवम्बर से 16 दिसम्बर तक दूसरे दल का प्रशिक्षण दिया जाना है।
चंपावत में सहासिक खेल—सपना या खतरा?
लेकिन परिषद ने ऐसी कंपनी को पैराग्लाईडिंग कोर्स करवाने का ठेका दिया जिस के पास खुद पैराग्लाईडिंग से जुडे विभिन्न कोर्स कराने की काबलियत ही नहीं है । इसके अलावा जिस जगह से पैराग्लाईडिंग करवाई जा रही है वो उडान भरने के लिए सुरक्षित है या नहीं उस पर भी बडा प्रशन चिन्ह है ।
चंपावत के जिस स्पॉट से ये पैराग्लाईडिंग की उडाने भरी जा रही है ,उस साईट का चयन किसने किया ये एक बडा सवाल है । दरअसल पैराग्लाईडिंग की उडान भरने वाले स्थान और लैंडिंग करने वाले स्पॉट को एक तकनीकी कमेटी से सुरक्षा के लिहाज से अप्रूव करवाना जरुरी है।
साइट सुरक्षित है या नहीं—खुद अधिकारी भी नहीं जानते
लेकिन चंपावत में हो रही पैराग्लाईडिंग के टेक ऑफ स्पॉट और लैडिंग स्पॉट को किसने अप्रुव किया है इस सवाल का जवाब हमने चाहा तो जवाब हैरान करने वाला था । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को संचालित कर रहे प्रशिक्षण समन्वयक एवं साहसिक खेल अधिकारी, भीमताल बलवंत सिंह कपकोटी, से जब हमने फोन पर पूछा कि क्या ये साईट टैक्निकल कमेटी से अप्रूव की गई है। तो उनका जवाब था कि इसके लिए आप आर टी आई लगा सकते हैं मैं इसके लिए अधिकृत नहीं हूँ । ऐसे में गंभीर सवाल उठता है कि पैराग्लाईडिंग की ये साईट पूरी तरह से सुरक्षित है इस बात का कॉनफिडेंस खुद प्रशिक्षण कार्यक्रम कराने वाले सहासिक खेल अधिकारी में क्यों नहीं है ।

जिनकी योग्यता शून्य, प्रशिक्षण उन्हीं से
पर्य़टन विकास परिषद चंपावत में महाराष्ट्र की एक कंपनी से पैराग्लाईडिंग प्रशिक्षण करवा रहे है।कंपनी का नाम है पैराग्लाईडिंग मंत्रा । इस कंपनी के सर्वे सर्वा तानाजी ताकवे को परिषद ने नियम विरुद्ध पूरे उत्तराखण्ड के पैराग्लाईडिंग ट्रैनिंग और पैराग्लाईडिंग से जुडे आयोजन की जिम्मेदारी दे दी गई है। और उसे मैंटोर बना दिया गया है । हालांकि ये पद कैसे सृजित हुआ परिषद के अंदर भी किसी को पता ही नहीं ।
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लेकिन तानाजी ताकवे उत्तराखंड फुट लांच एयरो स्पोर्ट नियामावली जो कि पैराग्लाईडिंग से जुडे नियमों को लेकर बनाई गई है । उसके किसी नियम को पूरा ही नहीं करता । पैरागलाईडिंग इंस्ट्रक्टर के पास 35 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करने का डिजिटल लॉग होना चाहिए । लेकिन जब इससे जुडी जानकारी हमने आर टी ई के जरिए पर्यटन विकास परिषद से मांगी तो उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं थी । तानाजी ताकवे से भी हमने मेल के जरिए ये जानकारी मांगी । उसने भी जानकारी देने से ये कहते हुए मना कर दिया कि ये उसकी व्यक्तिगत जानकारी है । ये भी गजब हाल है जिस व्यकिति के प्लाईंग आवर्स की जानकारी परिषद के पास नहीं है । उसी से वो नए पॉयलट को उडान भरने की ट्रैनिंग दिलवा रहे हैं और उनके प्लाईंग आवर्स पूरा करवा रहे हैं ।
इसके अलावा नियामावली में दी गई न्यूनतम शैक्षिक योग्यता भी तानाजी ताकवे पूरी नहीं करता जो कि 12 वीं पास है ।
पहेल भी हम कर चुके हैं खुलासे
इस मामले का खुलासा करती विस्तृत रपटें हमने अपने पोर्टल पंचायत रिपोर्टर में, दो किस्तों में अपने पाठकों के सामने पहले रख चुके है। इसके अलावा अपने फेसबुक पेज पंचायत रिपोर्टर व यू ट्यूब चैनल @thehillstories में भी हम तानाजी टाकवे को लेकर खुलासा कर चुके हैं ,जो अभी भी जारी है । इसमें हमने बताया कि कैसे तानाजी टाकवे जो कि पैराग्लाईडिंग उपकरणों की एक विदेशी कंपनी का भारत में डीलर है वो परिषद में रहते हुए पैराग्लाईडिंग उपकरण खरीद के टेंडर बना रहा है,और टेंडरों में बदलाव कर रहा है और उसका लाभ ले रहा है । साथ ही पैराग्लाईडिंग से जुडी इसकी योग्यताओं पर भी गंभीर सवाल हमने अपनी रपट में उठाऐं है।
आसमान में खेले जाने वाले इस सहासिक खेल की जिम्मेदारी अगर किसी अयोग्य व्यक्ति को दी जाती है तो ये प्रशिक्षार्थी की जान से सीधा सीधा खिलवाड़ है । लेकिन इस पर पर्य़टन विभाग सब कुछ जानते हुए आँख मूँदे और हाथ जोडे ,तानजी के सामने मानो आरती की थाली लिए बैठा है । सरकारी पैसे की इस बंदरबाट में पर्यटन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल है जिसकी जांच होनी चाहिए । लेकिन पर्यटन विभाग तो इस कंपनी पर कर्रवाई करने के बजाए इसे ब्लैक लिस्ट करने के बदले उसकी ताल पर नाच रहा है ।






