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Home Uttarakhand

EXclusive -केदारनाथ VIP खर्च मामला: शासन की जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि, BKTC के तीन तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

Panchayat Reporter by Panchayat Reporter
July 11, 2026
in Uttarakhand, उत्तराखंड, देहरादून, बड़ी खबर, स्पेशल, होम
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Chardham Yatra 2024: बाबा केदार के धाम में उमड़ा भक्तों का सैलाब, श्रद्धालुओं की संख्या दो लाख पर
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देहरादून। केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों के आवास, भोजन और अन्य आतिथ्य सत्कार पर मंदिर समिति के कोष से खर्च किए जाने के विवाद में अब बड़ा प्रशासनिक मोड़ आ गया है। उत्तराखंड शासन की जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के तीन तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह वही मामला है, जिसने मई 2026 में आरटीआई के जरिए सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी। आरोप था कि श्रद्धालुओं के दान से संचालित मंदिर समिति के कोष से कई वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन का खर्च उठाया गया। उस समय जिन नेताओं और जनप्रतिनिधियों के नाम सामने आए थे, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन खर्चों का खंडन करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने ठहरने और यात्रा का भुगतान स्वयं किया था तथा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
शासन की जांच में क्या मिला?
25 जून 2026 को पर्यटन एवं धर्मस्व अनुभाग-1 के उप सचिव अनिल कुमार पाण्डेय द्वारा जारी गोपनीय पत्र के अनुसार, मुख्य कार्याधिकारी BKTC द्वारा भेजी गई जांच आख्या का परीक्षण किया गया।
जांच में पाया गया कि मंदिर कोष से बिना सक्षम स्तर की स्वीकृति के अग्रिम धनराशि जारी की गई, जिसे वित्तीय अनियमितता माना गया है।
किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध?
शासन के पत्र में निम्न अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं—
तत्कालीन व्यवस्थापक, केदारनाथ
तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी, केदारनाथ
तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति
शासन ने निर्देश दिए हैं कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा संबंधित नियमावलियों के तहत इन अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आरटीआई से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा मामला आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के बाद सामने आया था। दस्तावेजों में आरोप लगाया गया था कि कुछ वीआईपी व्यक्तियों के आवास और भोजन का खर्च मंदिर समिति ने वहन किया।
उस समय जिन प्रमुख नामों की चर्चा हुई थी, उनमें भाजपा नेता नेहा जोशी, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी के निजी सहायक तथा अन्य कुछ वीआईपी व्यक्तियों के नाम शामिल थे।
हालांकि, नेहा जोशी और आशा नौटियाल ने इन आरोपों का स्पष्ट खंडन करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने ठहरने का भुगतान स्वयं किया था तथा यह भी सवाल उठाया था कि उनके नाम पर खर्च कैसे दर्शाया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अब आगे क्या?
शासन के निर्देशों के बाद अब निगाहें BKTC पर टिकी हैं कि वह जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान के उपयोग, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
यदि शासन के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई होती है, तो यह केदारनाथ VIP खर्च प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जाएगी

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