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Home Uttarakhand

इन्वेस्टिगेशन: ‘डेमोग्राफिक चेंज’ और ‘लैंड जिहाद’—सरकारी फाइलों में कोई अस्तित्व नहीं

आरटीआई का खुलासा: फाइलों में गायब, भाषणों में 'लैंड जिहाद'; धामी सरकार के बड़े दावों के पास नहीं है कोई आधिकारिक डेटा

Panchayat Reporter by Panchayat Reporter
May 6, 2026
in Uttarakhand, उत्तराखंड, देहरादून, बड़ी खबर, राजनीति, स्पेशल
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इन्वेस्टिगेशन: ‘डेमोग्राफिक चेंज’ और ‘लैंड जिहाद’—सरकारी फाइलों में कोई अस्तित्व नहीं
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इन्वेस्टिगेशन: ‘डेमोग्राफिक चेंज’ और ‘लैंड जिहाद’—सरकारी फाइलों में कोई अस्तित्व नहीं
RTI जवाबों में कई अहम विभागों के पास इस विषय पर कोई समेकित रिपोर्ट, सांख्यिकीय डेटा या आधिकारिक फाइलें नहीं मिलीं, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इन्हीं शब्दों को अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक भाषा का हिस्सा बनाए हुए हैं.

उत्तराखंड की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से दो शब्द लगातार केंद्र में रहे हैं—डेमोग्राफिक चेंज और लैंड जिहाद। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन शब्दों को न सिर्फ़ रैलियों और सरकारी मंचों पर, बल्कि विधानसभा के भीतर भी बार-बार दोहराया है। सरकार की तरफ़ से इन्हें राज्य की अस्मिता, कानून-व्यवस्था और जमीनों पर अवैध कब्जों से जोड़कर पेश किया गया है, और इसी आधार पर सख्त कार्रवाई तथा “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा किया जाता रहा है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हिंदुत्व का पोस्टर बॉय बनने की कोशिशें करते रहे
लेकिन इस पूरे विमर्श के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मुद्दों को सरकार बार-बार जनता के सामने प्रदेश के सबसे बडे संकट की तरह रखती है, उनके समर्थन में आधिकारिक, एकीकृत और प्रमाणिक डेटा आखिर है कहाँ? हमें आरटीआई में मिले जवाबों के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय, गृह विभाग, राजस्व विभाग, आवास विभाग, देहरादून और हरिद्वार के जिलाधिकारी कार्यालयों, एसएसपी कार्यालयों और सी एम के विधानसभा कार्यालय तक से जानकारी मांगी गई, लेकिन कई जगहों से या तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला या फिर आवेदन को दूसरे विभागों में स्थानांतरित कर दिया गया।

 

 

।
किस  विभाग ने क्या कहा ।
मुख्यमंत्री कार्यालय
मुख्यमंत्री कार्यालय उत्तराखण्ड ने अपने सभी सेक्शनों, विधानसभा डेस्क और सचिवालय में तैनात मुख्यमंत्री के निजी सचिवों से जानकारी जुटाने की कोशिश की।
लेकिन नतीजा—पूरी तरह खाली।
सी एम ऑफिस ने अपने जवाब में साफ किया कि उनके पास “डेमोग्राफिक चेंज” या “लैंड जिहाद” से जुड़ा कोई भी दस्तावेज, रिपोर्ट या डेटा उपलब्ध नहीं है।

 

इसके बाद यह कहते हुए कि संबंधित जानकारी संभवतः उच्च स्तर पर हो सकती है, आवेदन को मुख्य सचिव कार्यालय उत्तराखण्ड को ट्रांसफर कर दिया गया।
________________________________________
मुख्य सचिव कार्यालय
मुख्य सचिव कार्यालय, जो राज्य का सबसे शीर्ष प्रशासनिक केंद्र माना जाता है, वहां से भी चौंकाने वाला जवाब मिला—यहां भी कोई जानकारी नहीं।
RTI के जवाब में स्पष्ट किया गया कि:
• “डेमोग्राफिक चेंज” पर कोई अध्ययन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं
• “लैंड जिहाद” से संबंधित कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या पत्राचार मौजूद नहीं
इसके बाद मुख्य सचिव कार्यालय ने भी इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाते हुए RTI को:
• गृह विभाग
• राजस्व विभाग
• आवास विभाग
को ट्रांसफर कर दिया।

 

________________________________________
गृह विभाग
गृह विभाग उत्तराखण्ड से जब इन दोनों मुद्दों पर रिपोर्ट, डेटा और पत्राचार मांगा गया, तो यहां से भी जवाब निराशाजनक ही रहा—कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं।
हालांकि, अपने जवाब में गृह विभाग ने एक महत्वपूर्ण बात जरूर कही:
“अपीलार्थी द्वारा डेमोग्राफिक चेंज एवं लैंड जिहाद विषयक अध्ययन रिपोर्ट व सांख्यिकीय डेटा की मांग की गई है। इस संबंध में यह उल्लेखनीय है कि भारत में अंतिम आधिकारिक जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। 2011 के बाद कोई नई जनगणना नहीं हुई है, इसलिए वर्तमान में जनसंख्या परिवर्तन (डेमोग्राफिक चेंज) से जुड़ा प्रमाणित डेटा उपलब्ध नहीं है।”
यानि सरकार खुद मान रही है कि:
• नया डेटा मौजूद नहीं है
• कोई आधिकारिक अध्ययन नहीं हुआ है
इसके बावजूद, गृह विभाग ने भी इस RTI को आगे:
• राजस्व विभाग
• आवास विभाग
• जिलाधिकारी कार्यालय (देहरादून/हरिद्वार)
• SSP कार्यालय
को ट्रांसफर कर दिया। लेकिन इन विभागों के पास भी इन दो विषयों पर कोई जानकारी उपल्बध नहीं थी ।

 

 

यही वह बिंदु है, जो सरकार के राजनीतिक दावों और प्रशासनिक उपलब्धता के बीच की खाई को उजागर करता है। जब सर्वोच्च प्रशासनिक स्तर पर ही इन दावों का आधार स्पष्ट नहीं है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि विधानसभा और सरकारी मंचों से बार-बार दिए जा रहे ऐसे बयान किस ठोस अध्ययन पर टिके हैं.
राजनीतिक असर
धामी सरकार ने “लैंड जिहाद” और “डेमोग्राफिक चेंज” जैसे शब्दों को राज्य में कथित अवैध कब्जों, धार्मिक संरचनाओं और जनसंख्या बदलाव के खिलाफ अपने सख्त रुख के प्रतीक के तौर पर स्थापित किया है। मुख्यमंत्री इसे निर्णायक नेतृत्व और प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण बताते हैं, जबकि सूचना के अधिकार से मिली जानकारी इशारा करती है कि यह एक ऐसा राजनीतिक नैरेटिव है, जिसका इस्तेमाल जनभावनाओं को साधने और जटिल प्रशासनिक सवालों को भावनात्मक बहस में बदलने के लिए किया जा रहा है.
सवाल उठता है यदि किसी मुद्दे पर सरकार के पास न तो स्पष्ट अध्ययन है, न समेकित डेटा, और न ही विभागीय अभिलेख, तो उसे सार्वजनिक बहस में बार-बार एक स्थापित तथ्य की तरह पेश करना जिम्मेदार शासन की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर बिना स्पष्ट आँकड़ों के दिए गए दावे, राजनीतिक रूप से प्रभावी भले हों, लेकिन प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल ज़रूर खड़े करते हैं.
यह केवल किसी बयान या भाषण की आलोचना नहीं करती, बल्कि सरकारी दावों और विभागीय वास्तविकता के बीच के अंतर को सामने लाती है। अगर सरकार किसी विषय को राज्य का बड़ा संकट बताती है, तो उस संकट की पहचान, माप, अध्ययन और रिकॉर्ड भी उसी मजबूती से मौजूद होना चाहिए। यही वजह है कि डेमोग्राफिक चेंज और लैंड जिहाद के नाम पर गढ़ी गई राजनीतिक सख्ती, बिना डेटा के, एक सवालिया छवि बन जाती है.
सबसे जरुरी बात लेकिन विधानसभा में दिया गया बयान सिर्फ राजनीतिक भाषण नहीं होता—यह एक रिकॉर्डेड पब्लिक पॉलिसी स्टेटमेंट होता है। ऐसे में बिना तथ्य और डेटा के इस तरह के दावे करना गंभीर सवाल खड़े करता है। साल 2026 के बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने डैमोग्राफिक चैंज और लैंड जिहाद पर बोलते हुए कहा कि इसकी बढती हुई घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने प्रभावी कानून बनाऐं । सही डेटा ,सर्वेक्षण के अभाव में ये कानून धरातल पर कितने प्रभावी होंगे ये यक्ष प्रशन है ।
इन दिनों सोशल मिडिया में इन दो शब्दों का प्रयोग कर कई नफरती अपनी छोटी छोटी दुकानें चला रहे हैं । डैमोग्राफिक चैंज और लैंड जिहाद के चलते किसी के घर में घुस जाना ,सडक चलते किसी को पीट देना सोशल मीडिया मे विडियो बनाकर धार्मिक भावनाओं को भडकाने जैसी घटनाओं में तेजी आई है । इसकी एक प्रमुख वजह ये भी है कि शीर्ष स्तर पर भी इन जुमलों को आधिकारीक तौर परअपनी राजनीतिक विचार धार के प्रसार के लिए प्रयोग किया जा रहा है । ऐसे में विधानसभा के अंदर कोई जिम्मेदार पद पर बैठा व्यकित ऐसी बात बिना तथ्यों के रखता है तो वो इन छोटे नफरतियों का अपग्रेड़ वर्जन से ज्यादा कुछ नहीं लगता ।

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