महाराष्टट्र एक कंपनी पैराग्लाईडिंग मंत्रा जिसके आगे हमारा पर्यटन विभाग पूजा की थाल लिए खड़ा है । जिसकी धुन पर पूरा पर्यटन विभाग नाच रहा है । इस कंपनी का मालिक तानाजी ताकवे कैसे पर्यटम विभाग में करप्शन का नया इतिहास लिख रहा है और पर्यटन विभाग के तात्कालिक सचिव से लेकर बोर्ड का सी ई ओ,सहासिक खेल अधिकारी से लेकर जिला पर्यटन अधिकारी अष्टांग प्रणाम करते हैं । ये रसूक पर्यटन विभाग में महाराष्ट्र से आए तानाजी ताकवे का है ।
तानाजी ताकवे एक शख्स जिसे नियमों को ताक पर रख कर उत्तराखण्ड़ में पैराग्लाईडिंग से जुडी सभी तरह की ट्रैनिंग और उससे जुडे इवेंट का ठेका दे दिया गया । जिसके बाद वो इतना ताकतवर हो गया कि पर्य़टन विकास बोर्ड के अंदर पैराग्लाईडिंग से जुडे उपकरण खरीदने का ना केवल टेंडर बनाता है बल्कि उन्हे अपने अनुसार बदलता है । और अपनी मन चाही कंपनी को टेंडर भी दिलवा देता है । और इसका फायदा तानजी को मिलता है क्योंकि वो खुद पैराग्लाईडिंग उपकरण बेचने वाली एक विदेशी कंपनी का भारत में डीलर भी है । इस रिपोर्ट में हम ऐसा ही एक मामला आपको बताने वाले हैं जिसमें तानाजी अपनी करीबी महिला जिसे उसकी धर्मपत्नि बताया जा रहा है के नाम पर पैराग्लाईडिंग उपकरण खरीद का काम हथिया लेता है।इस रोपोर्ट में हम बताने जा रहे हैं कि कैसे तानाजी ताकवे बोर्ड में रहकर इतना ताकतवर हो गया कि वो पैराग्लाईडिंग के खेल के साथ साथ गलत तरीके से अपना धंधा चमकाने के खेल में लग गया
तानाजी ताकवे और पर्यटन विभाग की इन कारिस्तानियों पर हम दो रिपोर्ट बना चुके है जिसका लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में है ।


पर्यटन विकास बोर्ड के अंदर पैराग्लाईडिंग के लिए कुछ पैराशूट खरीदे जाने थे । और तानाजी जी टाकवे ने अपनी करीबी महिला के नाम से कोटेशन डाली और उपकरण खरीद का काम उसे मिल गया । जबकि ठीक इसी समय उसके पास उत्तराखण्ड पर्य़टन विकास परिषद ने उसे पूरे प्रदेश में पैरागलाईडिंग ट्रैनिंग की जिम्मेदारी दी हुई थी । ये मामला सीधे सीधे हितों के टकराव यानी कॉन्फिलिक्ट ऑफ इन्ट्रस्ट का तो दिखता ही है । लेकिन पैराशूट खरीदने के इल काम को हथियाने के लिए उसने आपराधिक तिगडम भी भिडाई । ऐसे भी संकेत मिल रहे है। और ये काम पर्यटन विभाग की मिली भगत के बगैर हो ही नहीं सकता है ।

आर टी आई से जुडी जो जानकारी हमें मिली वो बताती है कि टिहरी जिले में पैराग्लाईडिंग के अलग अलग कोर्स के लिए 4 कोमा रेस्क्यू रिजर्व पैराशूट खरीदने के लिए तानाजी ताकवे की कंपनी पैराग्लाईडिंग मंत्रा देहरादून पर्यटन विकास परिषद से कहती ।पैराग्लाईडिंग मंत्रा यानी की तानाजी ताकवे । कैसे वो खुद जरुरत पैदा करता है और उसकी पूर्ती भी खुद ही करता है । पैराशूट खरीद के जिम्मेदारी परिषद देता है जिला पर्यटन विकास अधिकारी टिहरी को । औऱ इसके लिए कोटेशन मंगाई जाती है । ये कोटेशन मंगाने के लिए पर्यटन अधिकारी का कार्यलाय क्या प्रकिया अपनाता है ये तो आर टी आई से बहुत स्पष्ट नहीं हुआ । । हां एक पत्र से ये पता चलता है कि टिहरी जिले के अलग अलग सम्बंधित सरकारी दफ्तरों के नोटिस बोर्ड इस बाबत सूचना चस्पा कर दी जाती है । इसके बाद तीन कोटेशन पर्य़टन विकास अधिकारी को प्राप्त होती हैं ।

पहली कोटेशन थी सारिका टाकवे की जो की काशमेत पूने की थी
दूसरी कोटेशन थी दत्ता केदारी की ये भी काशमेत पूने के थे ।
और तीसरी कोटेशन थी सचिन गवाने की जो जिनका पता भी पूने महाराष्ट्र था ।
पहला सवाल तो यहाँ ये उठ रहा है कि टिहरी के दफ्तरों में चस्पा एक सूचना की जानकारी महाराष्ट्र के इन लोगों तक कैसे पहुँची और दूसरा सवाल ये ही कि पहुँची तो सिर्फ महाराष्ट्र ही के लोगों तक पहुँची । बगल में हिमाचल प्रदेश भी है जो पैराग्लाईडिंग का हब माना जाता है वहाँ ये सूचना क्यों नहीं पहुँची ।
फिलहाल, सारिका टाकवे ने सबसे कम दाम कोट किए थे इसलिए 4 पैराशूट सारिका टाकवे से खरीदने का निर्णय जिला पर्यटन अधिकारी टिहरी लेता है।
जिसके बाद लगभग 2लाख 50 हजार का भुगतान सारिका टाकवे को कर दिया जाता है ।
आर टी आई से जो सूचना हमें सारिका टाकवे द्वारा जिला पर्यटन विकास अधिकारी को प्रस्तुत बिल की एक प्रति मिली है । जो गंभीर सवाल पैदा करती है । क्योंकि इस बिल में कोई जी एस टी नंबर ही नहीं है । सवाल यहाँ पर ये है कि कैसे सारिका टाकवे से बिना जी एस टी नंबर के पैराशूट खरीद लिए गए । और उससे भी बड़ा सवाल ये है कि बिना जी एस टी नंबर के उसकी कोटेशन को अनुमति कैसे दे दी गई ।
अब जरुरी आपके दिमाग की घंटी बजी होगी । वैसे आपके दिमाग की घंटी टाकवे सरनेम सुन कर भी बजी होगी तो आप बिल्कुल सही हैं । दरअसल तानाजी ताकवे जिनके कहने पर ये पैराशूट खरीदे जा रहे थे । सारिका उसी तानाजी करीबी हैं । इतनी करीबी है उनका पता ,उनका बैंक सब कुछ तानाजी के पते और बैंक और उसकी ब्रांच से मेल खाता है ।
सारिका ताकवे ने टिहरी जिला पर्यटन अधिकारी ने जो कोटेशन दी ,जो बिल प्रस्तुत किया उसमें उनका पता पैराग्लाईडिंग मंत्रा कंपनी के पते से मेल खाता है । तानाजी ताकवे ने कई बार यू टी डी बी से किए गए पत्राचारों में अपना पता काशमेत पूने का बताया है । और यही पता सारिका ताकवे का भी है । इतना ही नहीं सारिका टाकवे ने जो बिल कार्यलय में प्रस्तुत किए हैं उनमें एच डी एफ सी बैक का एकाउंट नंबर दिया गया है । जो कि एक बार फिर तानाजी ताकवे के पैरागलाईडिंग मंत्रा के बैंक की ब्रांच और आई एफ एस सी कोड़ से मेल खाता है । जो ये बताने को काफी है कि पैराग्लाईडिंग मंत्रा और सारिका ताकवे में गहरा सम्बंध है ।
सारिका ताकवे ने कोटेशन दी, बाकी दो कोटेशन से उनकी कीमत कम थी उन्हें पैराशूट डिलवरी का काम मिल गया । ऐसे में सारिका ताकवे अगर तानाजी की करीबी भी हैं । तो उन्होने पारदर्शी प्रक्रिया से काम हासिल किया है । ये तर्क भी आपके दिमाग में आ सकता है ।
लेकिन हम फिर भी कह रहे है इस पूरे मामले में जालसाजी की दुर्गंध आ रही है । इसका कारण है । जो हम अब आपको आगे बताते है ।
सारिका टाकवे के साथ दो और कोटेशन आई थी । सचिन गवाने और दत्ता केदारी की । हमने इन दोनों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सबसे पहले सोशल मीडिया खंगाला जहाँ हमें मिला सारिका टाकवे का फैसबुक प्रौफाईल । लेकिन ये क्या यहाँ एक मात्र फोटो लगी थी तानाजी ताकवे की ।
अब हमने सारिका ताकवे की फ्रैंड लिस्ट को खंगालना शुरु किया तो हमें उनकी फ्रैंड लिस्ट में मिला पैराग्लाईडंग मंत्रा का प्रौफाईल । तानाजी ताकवे की ये कंपनी इस समय पैराग्लाईडिंग से जुडी ट्रैनिंग पूरे उत्तराखण्ड में करवा रही है । उसके बाद हमने थोड़ी और मेहनत की तो फिर एक और जाना पहचाना नाम सामने आया सैलेश ग्वाने । क्योंकि इसी नाम के शख्स ने पैराशूट खरीद में कोटेशन डाली थी जिसका पता पूने महाराष्ट्र था । और यही डिटेल हमें इस फेसबुक प्रौफाईल में भी देखने को मिली । इसके बाद हमने ग्वाने की प्रौफाईल खंगाली तो इनकी पोस्ट में हमने देखा कि इन्होने पैराग्लाईडिंग मंत्रा की पोस्ट शेयर की हुई है। इसके बाद इनकी फ्रैंड लिस्ट हमने खंगाली तो हमे तानाजी ताकवे भी वहाँ मिल गए । लेकिन एक नाम जिसने हमें सबसे ज्यादा चौंकाया वो था बलवंत कपकोटी की प्रौफाईल । इनकी प्रौफाईल में इनके बारे में पढा तो और ज्यादा हैरत हुई बलवंत कपकोटी उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड में तात्कालिर सहासिक खेल अधिकारी रहे हैं और मौजूदा समय में नैनीताल में कार्यरत हैं। इसके अलावा आर टी आई से मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि तानाजी ताकवे के साथ सारे ट्रैनिंग प्रौग्राम करवाने की जिम्मेदारी इन्हीं के उपर थी । बोर्ड के लिए टिहरी में कराए गए सारे बडे आयोजनों में इनको अलग से महत्तवपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी । ये भी सैलेश ग्वाने की फ्रैंड लिस्ट में शोभा बढा रहे थे ।
इसके बाद हमने तीसरे व्यक्ति दत्ता केदारी जिन्होने कोटेशन डाली थी को सर्च किया । सारिका टाकवे की ही फ्रैंड लिस्ट में इनकी उपस्थति हमें दिखाई दे गई । इनका प्रौफाईल लॉक था । तो हमने इंस्टाग्राम में इनके डिजीटल फुट प्रिंट ढूंढे तो हमें दत्ता केदारी नाम से एक इंस्टाग्राम प्रौफाईल मिला । इसमें दत्ता केदारी पैराग्लाईडर उडाते हुए दिखाई दे रहे हैं और खास बात ये है कि वो पैराग्लाईडर उत्तरखण्ड पर्यटन विभाग का है क्योंकि उसमें उसका लोगो छपा हुआ है । इतना ही नहीं आर टी आई के जिरिए टिहरी में हुए अलग अलग ट्रैनिंग प्रौग्राम की जो तस्वीरें हमें मिली उसमें भी दत्ता कैदारी हमें दिखाई देता है ।
है ना हसीन इत्फाक जिन लोगों ने टेंडर डाले या तो उनका सीधा कनैक्शन तानाजी से दिख रहा है । या फिर कोटेशन डालने वाले लोगों से मिलते जुलते नाम वाले लोग तानाजी ताकवे के साथ मौजूद है ।
लेकिन इस इत्फाक का सिलसिला सरकारी कागजों तक जाता है । पर्यटन विकास परिषद की तरफ से जो आर टी आई मिली है । उसमें ट्रैनिंग के दौरान दिए गए सरकारी बिलों में भी तानाजी ताकवे ,दत्ता केदारी ,सचिन ग्वाने और बोर्ड के सहासिक खेल अधिकारी रहे बलवंत सिंह कपकोटी का नाम एक साथ एक ही बिल में दिखाई दे रहा है । ये ट्रैनिंग के दौरान खाने पीने के बिल है । और टिहरी में इन लोगों ने एक साथ बैठकर लंच औऱ डिनर का मजा लिया है ।

हम ये नहीं कह रहे कि कोटेशन डालने वाली सारिका टाकवे ,दत्ता केदारी और सैलेश ग्वाने वही है जो तानाजी और बलवंत कपकोटी के साथ टिहरी में लंच और डिनर कर रहे थे । लेकिन इस बात को पूरी तरह से खारिज भी तो नहीं किया जा सकता ।
सारिका ताकवे का तो तानाजी से कनैक्शन साफ दिखाई दे रहा है । उनका पता एक ही है ।दोनों का खाता एक ही बैंक की एक ही ब्रांच में है।
दत्ता केदारी का पता कोटेशन में काशमेत पूने है जो कि तानाजी ताकवे का भी पता है और सारिका ताकवे की भी है ।
सैलेश गवाने भी महाराष्ट्र के ही हैं।
एक काम के लिए तीन जगह से कोटेशन आती है और तीनों महाराष्ट्र से ।
और सबसे बडी बात उस समय पर्य़टन विभाग के सबसे बडे अधिकारी ,सचिव सचिन कुर्वे भी महाराष्ट्र के ही है । और पर्य़टन विकास बोर्ड के अधिकारी बलवंत कपकोटी भी इनके साथ मौजूद हैं । देखिए हैं ना ये भी खूबसूरत इत्फाक । ये सारी कढियाँ आपस में जुड रही हैं । और इसका जवाब पर्यटन विभाग को देना चाहिए कि तानाजी ताकवे से जुडी सारिका ताकवे को पैराशूट खरीद का ये काम कैसे मिल गया जो कि तानाजी ताकवे से कनैक्टेड है और तानाजी ताकवे भारत में एक विदेशी पैराग्लाईडिंग उपकरण बेचने वाली कंपनी का डीलर भी है । इसके साथ ही ट्रैनिग प्रौग्राम देख रहे तात्कालिक सहासिक खेल अधिकारी बलवंत सिंह कपकोटी और तात्कालिक टिहरी जिला पर्यटन अधिकारी की इस पूरे मामले में भूमिका की जांच भी की जानी बेहद जरुरी है ।






