उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर चल रहे सिस्टम पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरटीआई दस्तावेज़ों और बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड्स की जांच में एक बड़ा खेल सामने आया है—जहाँ एक बाहरी कंपनी का डीलर सरकारी सिस्टम में ऐसी घुसपैठ कर चुका है कि वह न सिर्फ एडवेंचर स्पोर्ट्स से जुड़े इवेंट्स और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स करवा रहा है, बल्कि उपकरण खरीद से जुड़े टेंडर भी अपने हिसाब से तैयार करवाता दिखाई देता है।

स्थानीय युवाओं के हक पर कुठाराघात, और करोड़ों के टैक्स का खेल
राज्य निर्माण के बाद एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बने उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड पर अब आरोप है कि यह स्थानीय युवाओं और प्रदेश की क्षमता को नज़रअंदाज़ कर बाहरी कंपनियों के हितों को आगे बढ़ा रहा है।
इसी कड़ी में सामने आया है पैराग्लाइडिंग उपकरण खरीद का मामला, जहाँ करोड़ों के घोटाले के संकेत साफ दिखाई देते हैं।
तानाजी टाकवे – कंपनी मालिक, विदेशी डीलर और बोर्ड मेंटर, तीन भूमिकाएँ एक व्यक्ति के हाथ में
घोटाले का केंद्र बताया जा रहा है तानाजी टाकवे, जो—
पैराग्लाईडिंग मंत्रा नामक निजी कंपनी के मालिक हैं,
चेक रिपब्लिक की कंपनी Sky Paragliders के भारत में सबसे बड़े डीलर हैं,
और उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग में मेंटोर भी नियुक्त हैं।
आरटीआई में मिले दस्तावेज़ बताते हैं कि 25 दिसंबर 2023 (सरकारी अवकाश) को तानाजी ने पर्यटन सचिव/सीईओ सचिन कुर्वे को एक प्रस्ताव भेजा, जिसमें पैराग्लाइडिंग उपकरणों की स्पेसिफिकेशन और उन कंपनियों के नाम भी शामिल थे, जिनसे उपकरण खरीदने की सिफारिश की गई थी।
इसके बाद जनवरी 2024 में दूसरा पत्र भेजा गया, इस बार सीधे Sky Paragliders कंपनी और उसके विशेष मॉडलों का नाम लिखकर।
यानी प्रस्ताव सिर्फ सुझाव नहीं था—बल्कि तय कंपनियों की ओर इशारा करता था।
टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
23 फरवरी 2024 को ऑनलाइन टेंडर निकले, जिन्हें अचानक रद्द कर दिया गया।
आरटीआई में सामने आया कि ACO कर्नल अश्विनी पुंडीर के निर्देश पर टेंडर रद्द किए गए क्योंकि तानाजी टाकवे की कंपनी ने “टेक्निकल स्पेसिफिकेशन एवं संख्या” बदल दी थी।
3 मार्च 2024 को नया टेंडर जारी किया गया—और यहीं असली खेल सामने आता है:
टेंडर से दो महत्वपूर्ण शर्तें हटाईं गईं—
पिछले 5 सालों में 10 लाख का सप्लाई अनुभव
पिछले तीन सालों का 20 लाख का टर्नओवर
आरटीआई में स्वीकार किया गया कि यह बदलाव तानाजी टाकवे के कहने पर किया गया।
एक दिन पुरानी कंपनी को करोड़ों का टेंडर!
नए टेंडर में सिर्फ दो कंपनियाँ शामिल होती हैं —
Sky Nimbus Enterprises
Raj Travels Agency
और 88 लाख के उपकरण खरीद का काम Sky Nimbus को मिल जाता है।
सबसे चौंकाने वाली बात:
Sky Nimbus Enterprises का GST रजिस्ट्रेशन 4 मार्च 2024 को हुआ, यानी टेंडर निकलने के अगले ही दिन!
यानी जिस कंपनी का पैराग्लाइडिंग उपकरणों से कोई पूर्व अनुभव नहीं था, वह अचानक योग्य हो गई और टेंडर जीत भी गई।
दूसरी कंपनी Raj Travels Agency टिकट बुकिंग का काम करती है—उपकरण सप्लाई से उसका कोई लेना-देना नहीं।
सिस्टमेटिक नेक्सस: महाराष्ट्र कनेक्शन
जांच में सामने आया कि इस घोटाले में शामिल सभी प्रमुख किरदार एक ही राज्य से जुड़े मिले—
तानाजी टाकवे – पुणे, महाराष्ट्र
Sky Nimbus – पुणे, महाराष्ट्र
Raj Travels Agency – पुणे, महाराष्ट्र
तत्कालीन CEO/पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे – महाराष्ट्र
यह कड़ी संयोग मात्र नहीं लगती।
15 दिन में विदेशी उपकरण डिलीवरी? पहले से सेटिंग के संकेत
टेंडर की एक अजीब शर्त थी—
15 दिनों में सभी उपकरण सप्लाई करने होंगे।
जबकि भारत में पैराग्लाइडिंग उपकरण बनाने वाली कोई कंपनी नहीं है।
विदेश से ऑर्डर में ही हफ्तों लग जाते हैं।
ऐसे में सिर्फ वही सप्लाई कर सकता है जिसे पता हो कि वही टेंडर जीतने वाला है।
2024 नहीं, 2025 में भी जारी है खेल
6 अक्टूबर 2025 को जारी नए टेंडर में और भी कठोर शर्तें जोड़ दी गईं—
सिर्फ एरो स्पोर्ट्स के अधिकृत सप्लायर ही भाग ले सकते हैं
पिछले तीन सालों का 70 लाख का टर्नओवर
उपकरण सप्लाई – फिर से 15 दिन में
स्पष्ट है कि शर्तें किसी विशेष कंपनी को ध्यान में रखकर ही तैयार की गई हैं।
निष्कर्ष: स्थानीय युवाओं के साथ बड़ा धोखा
टेंडर शर्तें मनमर्जी से बदली गईं
बिना अनुभव वाली कंपनी को करोड़ों का काम
विदेशी कंपनी के डीलर को सिस्टम में मेंटर बना दिया गया
बोर्ड के शीर्ष अधिकारी सवालों के घेरे में
यह मामला दिखाता है कि कैसे सरकारी तंत्र में मिलीभगत से बाहरी कंपनियों को फायदा पहुँचाया जाता है और स्थानीय प्रतिभाओं को पीछे धकेला जाता है।
यह पैराग्लाइडिंग घोटाले की पहली कड़ी है, आगे की कड़ियों में और बड़े खुलासे किए जाएंगे।








