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Home उत्तराखंड

रक्षाबंधन पर मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण का मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया संकल्प

Panchayat Reporter by Panchayat Reporter
August 23, 2026
in उत्तराखंड, देहरादून, बड़ी खबर
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रक्षाबंधन पर मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण का मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया संकल्प
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मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को रक्षाबंधन के पावन अवसर पर देहरादून में आयोजित दो कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर प्रदेश की मातृशक्ति के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम जीएमएस रोड स्थित चौधरी फार्म में आयोजित रक्षाबंधन समारोह में प्रतिभाग किया। इसके पश्चात उन्होंने हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। दोनों ही कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी को रक्षा सूत्र बांधा और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्नेह और आशीर्वाद के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उत्तराखंड की समस्त माताओं और बहनों को रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि यह पवित्र पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियों की नई सौगात लेकर आए। उन्होंने कहा कि आज बहनों के बीच पहुंचकर उन्हें ऐसा अनुभव हो रहा है, जैसे कोई भाई अपने घर-परिवार के बीच पहुंचा हो। मातृशक्ति से मिल रहा स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और यही उन्हें उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक की सेवा के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि यह अटूट स्नेह, विश्वास, समर्पण और सुरक्षा के उस पवित्र संकल्प का पर्व है, जिसे भाई अपनी बहन के प्रति जीवनभर निभाने का प्रयास करता है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि रिश्ते केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के निर्वहन से मजबूत होते हैं। भाई का बहन के प्रति स्नेह एवं सुरक्षा का संकल्प और बहन का भाई के प्रति अटूट विश्वास—इन दोनों पवित्र भावनाओं को रक्षाबंधन और अधिक मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन हमें नारी सम्मान के महत्व का भी स्मरण कराता है। नारी का सम्मान केवल हमारा कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कार का आधार है। नारी परिवार की आधारशिला होने के साथ-साथ समाज और संस्कृति की भी मूल शक्ति है। जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वही समाज वास्तव में समृद्ध और संस्कारित बनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। जब महिला सशक्त होती है तो उसका लाभ केवल परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा समाज और राष्ट्र आगे बढ़ता है। आज महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर देश की सीमाओं तक, घर-परिवार से लेकर उद्योग और व्यवसाय तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। अब महिलाएं केवल सहभागिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि जब देवभूमि उत्तराखंड की मातृशक्ति की बात आती है तो उनका सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। पहाड़ की महिलाओं ने संघर्ष को अपनी शक्ति बनाया है और परिवार, समाज तथा प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

*महिला सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक पहल*

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री जी ने ‘नारी तू नारायणी’ के भाव को शासन की नीतियों और कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाने, जल जीवन मिशन के माध्यम से घर-घर नल से जल पहुंचाने, प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं को घर के स्वामित्व से जोड़ने तथा लखपति दीदी अभियान के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण, शौचालयों का निर्माण और तीन तलाक जैसी कुप्रथा के खिलाफ निर्णायक कदम भी महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। केंद्र सरकार की नीतियों के केंद्र में मातृशक्ति का सम्मान और कल्याण सर्वोपरि है।

*उत्तराखंड में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर*

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड सरकार भी मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों।

इसी उद्देश्य से उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं। ये स्वयं सहायता समूह केवल आय का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामूहिक शक्ति, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के मजबूत केंद्र बन चुके हैं। प्रदेश में 7 हजार से अधिक ग्राम संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठन भी महिलाओं की सामूहिक क्षमता और नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 3 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि पूरे प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उन्हें सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों के स्तर पर भी सशक्त किया जा रहा है। प्रदेश में सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। वहीं समान नागरिक संहिता के माध्यम से सभी वर्गों की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं की संख्या इतनी अधिक है कि यदि वे एक-एक योजना का उल्लेख करने लगें तो समय कम पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए ये योजनाएं केवल सरकारी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि मातृशक्ति को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन प्रदान करने की प्रतिबद्धता हैं।

*34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी*

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां के लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब उसका बेटा या बेटी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाए, रोजगार प्राप्त करे और अपने परिवार का सहारा बने। इसके विपरीत बच्चे के पढ़-लिखने के बाद भी रोजगार के लिए भटकना मां के लिए सबसे बड़ा दर्द होता है। सरकार ने इसी पीड़ा को समझते हुए अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल रोजगार देने की बात नहीं की, बल्कि भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार भी किए हैं। नकल विरोधी कानून लागू किया गया, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई तथा योग्य युवाओं के साथ अन्याय रोकने के लिए कठोर व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। आज प्रदेश का युवा यह विश्वास कर सकता है कि उसकी मेहनत का परिणाम उसकी योग्यता तय करेगी, न कि किसी नकल माफिया या भ्रष्ट व्यवस्था का प्रभाव।

“ *मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, एक भाई के रूप में आपके बीच आया हूं”*

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के रक्षाबंधन समारोह में वे केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक भाई के रूप में अपनी बहनों के बीच उपस्थित हैं। उन्होंने मातृशक्ति से कहा कि प्रदेश की किसी भी बहन या बेटी को कभी कोई परेशानी हो तो वह निःसंकोच अपनी बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा सकती है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उनकी समस्या का संज्ञान लेकर उसके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा और वे एक भाई होने के अपने दायित्व को निभाने का पूरा प्रयास करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए बहनों का विश्वास और स्नेह सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां बेटियां सुरक्षित हों, बहनें आत्मनिर्भर हों, माताएं सम्मान के साथ जीवन व्यतीत करें और प्रदेश का युवा अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने मातृशक्ति से आशीर्वाद, सहयोग और विश्वास की अपेक्षा की।

*रक्षाबंधन पर महिलाओं को निःशुल्क रोडवेज यात्रा की सौगात*

मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को विशेष सौगात देते हुए 28 और 29 अगस्त को उत्तराखंड रोडवेज की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा की घोषणा की। इस सुविधा से प्रदेश की महिलाएं रक्षाबंधन के अवसर पर अपने मायके और परिवारजनों से मिलने के लिए सुगमता से यात्रा कर सकेंगी। सरकार ने इस सुविधा के माध्यम से रक्षाबंधन के पर्व को मातृशक्ति के लिए और अधिक सुविधाजनक एवं आत्मीय बनाने का प्रयास किया है।

चौधरी फार्म, जीएमएस रोड में आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम के आयोजक  जोगिंदर सिंह पुंडीर, उत्तराखंड आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष  विनय कुमार रोहिला, अन्य जनप्रतिनिधि तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आई महिलाएं उपस्थित रहीं।

वहीं, हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री  गणेश जोशी एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष  विजया राहटकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।

 

दोनों कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ने उपस्थित बहनों से संवाद करते हुए रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति का स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास ही उन्हें प्रदेश की सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।

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